✨❄ इस़लाहे़ अग़लात़: अ़वाम में राएज ग़लतियों की इसलाह़ ❄✨
सिलसिला 43:
🌻 *दाएं हाथ से खाने पीने और लेन देन की फजी़लत और अहमियत*
🌼 *सुन्नते तयामुन (और दाईं जानिब का खयाल रखने की सुन्नत) की फज़ीलत:*
हुज़ूर अक़दस ﷺ को हर (फ़ज़ीलत व) शर्फ़, एह़तिराम और ज़ीनत वाले काम में दाईं जानिब की रिआ़यत मह़बूब (और पसंद) थी, इस महबू़ब अमल को सुन्नते तयामुन (दाएं जानिब का खयाल रखने की सुन्नत) कहा जाता है, चुनांचे सह़ीह बुखारी में है कि हुज़ूर अक़दस ﷺ को जूता पहनने, कंघी करने, पाकी हासिल करने हत्ता कि हर [शर्फ़ और ज़ीनत वाले] काम में दाईं जानिब पसंदीदा था:
168: عَنْ مَسْرُوقٍ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كَانَ النَّبِيُّ ﷺ يُعْجِبُهُ التَّيَمُّنُ فِي تَنَعُّلِهِ وَتَرَجُّلِهِ وَطُهُورِهِ وَفِي شَأْنِهِ كُلِّهِ.
इसी तरह सुनने नसाई में है कि हुज़ूर अक़दस ﷺ को दाईं जानिब की रिआ़यत (और दाएं तरफ का खयाल) मह़बूब (और पसंद) थी, जब कोई चीज़ लेते, तो दाएं हाथ से लेते और जब देते तो दाएं हाथ से देते, हत्ता कि तमाम [शर्फ़ और ज़ीनत वाले] कामों में उन को दाईं जानिब पसंदीदा था:
5074: عَن الْأَسْوَدِ بْنِ يَزِيدَ عَنْ عَائِشَةَ قَالَتْ: كَانَ رَسُولُ اللهِ ﷺ يُحِبُّ التَّيَامُنَ يَأْخُذُ بِيَمِينِهِ وَيُعْطِي بِيَمِينِهِ، وَيُحِبُّ التَّيَمُّنَ فِي جَمِيعِ أُمُورِهِ.
इन्हीं अहा़दीस की बुनियाद पर दीने इस्लाम में बहुत से कामों को सर अंजाम देने के लिए दाईं जानिब ही को मसनून, मुसतह़ब और पसंदीदा क़रार दिया गया है।
🌼 *शब व रोज़ (दिन और रात) की चार अहम सुन्नतें:*
ज़ैल में (नीचे) आदाबे ज़िन्दगी पर मुशतमिल (ज़िन्दगी के आदाब के बारे में) चार ऐसी अहम सुन्नतों का ज़िक्र किया जाता है जिन से हमें शब व रोज़ में (दिन रात) बहुत ज़्यादा वास्ता पड़ता है:
*सुन्नत ❶* पीने की चीज़ दाएं हाथ से पीना सुन्नत है, चाहे पानी हो, दूध हो, चाए हो या कोई भी पीने की चीज़ हो; सब का यही हु़क्म है।
*सुन्नत ❷* खाने की चीज़ दाएं हाथ से खाना सुन्नत है।
*सुन्नत ❸* किसी को कोई चीज़ देते वक़्त दाएं हाथ से देना सुन्नत है।
*सुन्नत ❹* किसी से कोई चीज़ लेते वक़्त दाएं हाथ से लेना सुन्नत है।
▫️ अहा़दीसे मुबारका में इन चारों कामों [यानी खाने पीने और कोई चीज़ लेने या देने] को दायें हाथ से सर अंजाम देने का हुक्म, जब्कि बायें हाथ से अंजाम देने की मुमानअ़त फ़रमाई गई (और मना किया गया) है और इसे शैतान का अमल क़रार दिया है कि वो ये चारों काम बायें हाथ से सर अंजाम देता है।
इसलिए हमें भी हुज़ूर अक़दस सल्लल्लाहु अ़लइहि वसल्लम के इस मुबारक इरशाद पर अ़मल करना चाहिए।
चूंकि शब व रोज़ (दिन रात) में ये चार काम बकसरत (और बहुत ज़्यादा) किये जाते हैं इसलिए अगर हम ये चार काम [बल्कि हर काम] करने से पहले ज़रा सी तवज्जु दें और ये सोच लें कि इस काम को करने का सुन्नत तरीक़ा क्या है, तो हम ये तमाम काम सुन्नत के मुताबिक़ सर अंजाम दे सकते हैं, और एक अहम नुकता ये भी है कि जब एक काम करना ही है तो क्यों ना सुन्नत के मुताबिक़ ही किया जाए! अलबत्ता उ़ज़्र और मजबूरी में बायें हाथ इस्तेमाल करने में कोई ह़र्ज नहीं।
▫️ अगर हम शब व रोज़ (दिन रात) के यह चार अहम काम सुन्नत के मुताबिक़ सर अंजाम दें, तो आप जानते हैं कि इस से बहुत बड़ा अज्र व सवाब भी हासिल होगा, सुन्नतों के साथ तअ़ल्लुक़ भी बढ़ेगा, अल्लाह तआ़ला, और उस के रसूल ﷺ की रज़ा, क़ुर्ब और मुहब्बत भी मयस्सर आएगी (और अल्लाह तआ़ला और उस के रसूल ﷺ की खुशनूदी नसीब होगी)
अल्लाह तआ़ला हम सब को इन सुन्नतों पर अ़मल की तोफीक़ अ़ता फरमाए।
☀️ सुनने इब्ने माजह में है:
हुज़ूर अक़दस ﷺ ने इरशाद फ़रमाया कि: "तुम में से हर शख्स दाएं हाथ से खाए, दाएं हाथ से पिये, दाएं हाथ से कोई चीज़ ले और दाएं हाथ से कोई चीज़ दे, क्योंकि शैतान बाएं हाथ से खाता है, बाएं हाथ से पीता है, बाएं हाथ से कोई चीज़ लेता है और बाएं हाथ से कोई चीज़ देता है।"
3266- عَنْ أَبِي سَلَمَةَ عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ: أَنَّ النَّبِيَّ ﷺ قَالَ: لِيَأْكُلْ أَحَدُكُمْ بِيَمِينِهِ، وَلْيَشْرَبْ بِيَمِينِهِ، وَلْيَأْخُذْ بِيَمِينِهِ، وَلْيُعْطِ بِيَمِينِهِ؛ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَأْكُلُ بِشِمَالِهِ، وَيَشْرَبُ بِشِمَالِهِ، وَيُعْطِي بِشِمَالِهِ، وَيَأْخُذُ بِشِمَالِهِ.
في «الزوائد»: إسناد حديث أبي هريرة صحيح، رجاله ثقات.
☀️ صحیح مسلم میں ہے:
5386- عَنْ سَالِمٍ عَنْ أَبِيهِ: أَنَّ رَسُولَ اللهِ ﷺ قَالَ: «لَا يَأْكُلَنَّ أَحَدٌ مِنْكُمْ بِشِمَالِهِ، وَلَا يَشْرَبَنَّ بِهَا؛ فَإِنَّ الشَّيْطَانَ يَأْكُلُ بِشِمَالِهِ، وَيَشْرَبُ بِهَا». قَالَ: وَكَانَ نَافِعٌ يَزِيدُ فِيهَا: «وَلَا يَأْخُذُ بِهَا، وَلَا يُعْطِى بِهَا». وَفِى رِوَايَةِ أَبِى الطَّاهِرِ: «لَا يَأْكُلَنَّ أَحَدُكُمْ».
☀️ مصنف ابن ابی شیبہ میں ہے:
24927- حَدَّثَنَا ابْنُ عُيَيْنَةَ عَنِ الْوَلِيدِ بْنِ كَثِيرٍ، عَنْ وَهْبِ بْنِ كَيْسَانَ سَمِعَهُ مِنْ عُمَرَ بْنِ أَبِي سَلَمَةَ قَالَ: كُنْتُ غُلَامًا فِي حِجْرِ النَّبِيِّ ﷺ وَكَانَتْ يَدِي تَطِيشُ فِي الصَّحْفَةِ، فَقَالَ لِي: «يَا غُلامُ، سَمِّ اللهَ، وَكُلْ بِيَمِينِكَ، وَكُلْ مِمَّا يَلِيكَ».
▫️ *फाएदा:*
बंदे ने "सुन्नते तयामुन: ह़क़ीक़त, फज़ीलतू और तफ़सीलात" के नाम से एक तफ़्सीली रिसाला भी लिखा है, जिस में ऐसे अअ़माल को जमा किया गया है, जिन में दाएं जानिब की रिआ़यत मह़बूब (और पसंदीदा) है।
✍🏻: मुफ्ती मुबीनुर रह़मान साह़ब दामत बरकातुहुम
फाज़िल जामिआ़ दारुल उ़लूम कराची
हिंदी तर्जुमा व तसहील:
अल्तमश आ़लम क़ासमी
9084199927

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